Saturday, May 23, 2020

बाल गीत-५



अमिताभ सिन्हा रचित बालगीत
  स्वरचित ककहरा पर आधारित बालगीत प्रस्तुत है। शायद आपको और बच्चों को भी पसंद आये 

१४) ट
टॉमी था एक छोटा कुत्ता
उजले लम्बे बालों वाला
आँखो पे आ जाते बाल
देख न पाता था बेहाल
गरमी से परेशान वो कुत्ता
जीभ निकाले हांफा करता
क्यो न इसके बाल काट ले
ऊन बना ले स्वेटर बुन ले
ऐसा हमने बस सोचा था
भूंक रहा है तब से टॉमी
क्या हमको वो मना कर रहा?
या उसकी हम माने हामी?
HTML5 Icon
HTML5 Icon१५) ठ 

ठेले से होता है मेला।
या होता मेले में ठेला।
बिकता आलू प्याज है इस पर ।
आम पपीता अमरुद केला ।
आईस क्रीम भी बिकता इसपर ।
मैंगो चोको और भेनीला ।
कुल्फी लस्सी बरफ का गोला।
खेल खिलौने का वो ठेला ।
कॉपी पेन्सिल और किताबे।
गंजी टोपी और ज़ुराबे।
मम्मी है फुचका शौकीन ।
रोको ! मम्मी उधर जा रही
जहां बिके चाट ओ नमकीन।
क्यों न हम भी चल कर ले ले
तीन चार कप आईसक्रीम।
१६) ड
डब्बे के अन्दर इक डब्बा
उसके अन्दर दूजा डब्बा
डब्बे के अन्दर कुछ रख दो
रखते क्यो डब्बे में डब्बा
एक में चीनी एक में कॉफी
एक में बिस्किट एक में टॉफी
किसी में बेसन किसी में आटा
पतला पोहा चावल मोटा
गरम मसाला हल्दी राई
नमक, मिर्च भी रख दो भाई
सब में कुछ कुछ रखते जाओ
फिर सब में परची चिपकाओ
एक एक कर रखो सजाओ
सुन्दर सा भण्डार बनाओ
HTML5 Icon
HTML5 Icon

१७) ढ
ढाई माने कितना होता है
कितना होता है भई ढाई
मुझको तो कुछ याद नहीं
क्या तुमको कुछ याद है भाई ?
एडी "नाना ने था मुझे बताया"
सीद्धी "दादी ने था मुझको"
लेकिन हम अब भूल गए है
फिर कौन बताए हमको
उम्मी "पांच का आधा होता ढाई
दो और आधा भी है ढाई"
लो अब तो ये समझ आ गया
अब कर लेते बाकी पढ़ाई

Monday, May 18, 2020

बाल गीत-४


अमिताभ सिन्हा रचित बालगीत
  स्वरचित ककहरा पर आधारित बालगीत प्रस्तुत है। शायद आपको और बच्चों को भी पसंद आये 

१०)च
चाची के पति का भाई कौन ?
जल्दी बोलो रहो न मौन।
छोटू बोला मेरे पापा ।
भैया बोला मेरे ताऊ

होने लगी जब झगड़ा झुगडी ।
धींगा मुस्ती बहसा बहसी।
दादी ने तब पास बुलाया ।
धीरे से उनको समझाया ।
चाचा के भैया है पापा।
पापा के भैया है ताऊ।
तुम दोनों ही सही हो छोटू।
तुम हो भाई वो है भाउ ।
HTML5 Icon
HTML5 Icon११)छ 
छत पर काला बन्दर आया।
सारा केला उसने खाया।
मुन्ना यह सब देख रहा था।
करूं क्या करूं सोच रहा था।
नाना! नाना! जल्दी आना ।
इस बन्दर को मार भगाना।
जिम जाम भी लेकर आना।
पेट का चूहा भी है भूखा ।
थोड़ा रोटी जाम भी लाना ।
१२)ज
जलेबी गोल गोल।
मुंह में देती मिस्री घोल।
बर्फी बनती है चौकोर ।
मुन्ना खाता इसको तोड़।
रस में डूबा है रसगुल्ला।
सब खाते बिन हल्लागुल्ला ।
HTML5 Icon
HTML5 Icon

१३) झ
झरबेरी में खोई बॉल ,
गली प्रीमियर लीग की बॉल ।
ढूंढो एडी ढूंढो उम्मी।
ढूंढो सिद्धि ढूंढो टुन्नी।
मेरी कोई कहाँ सुनता है ।
कहा था मारे कोई न सिक्सर ।
कल से बॉल तुम्हें ही लाना ।
मारा था क्यों तुमने सिक्सर ?
तभी दिख गयी सबको बॉल।
देखो वहां उस तरफ है बॉल।
ढूंढ लिया है हमने बॉल।
चलो खेलते अब फुटबॉल।

Saturday, May 16, 2020

बॉलीवुड में नृत्यों के प्रकार -2

पिछली बार मैने बॉलीवुड डांस के एक प्रकार 'मुजरे' की मीमांसा करने का प्रयत्न किया था। इस बार सबसे लोकप्रिय डांस का एक प्रकार कैबरे के बारे में लिख रहा हूँ। 60's में कैबरे किसी फिल्म की सफलता के लिए सबसे विश्वसनीय फॉर्मुला हुआ करता था। कैबरे नर्तकियां vulgar मानी जाती थी। उनकी लम्बी टांगे (और कई बार सिर्फ आधी ही ढ़की हुई), उत्तेजक पहरावा और catchy गीत, संगीत लोंगों को बरबस सिनेमा हाल तक खींच लाते थे। कैबरे  में अक्सर डांसर का विलेन  को इशारा करने का दृश्य रहा करता था और डांस को कहानी में जोड़ देने की कोशिश भी ।
1) कक्कू हिन्दी सिनेमा की शायद सबसे पहली कैबरे डांसर थी।

कक्कू बोलीवुड की पहली कैबरे क्वीन

उन्होनें 1946 मे फिल्म 'अरब का सितारा' से फिल्मी ज़िन्दगी शुरु की पर नाम मिला 1948 में बनी महबूब खान की फिल्म अनोखी अदा से जिसमें उन्होंने जो कैबरे नृत्य किया उसे आज की अवधारणा के हिसाब से कैबरे कह भी नहीं सकते। कई फिल्मों में  लोकप्रिय गीतों पर उनके नृत्य का जलवा 1963 तक चलता रहा। उनका फिल्मी सफर   :
  • अंदाज (1949) (गीत तू कहे अगर,  झूम झूम के नाचो आज ), 
  • चांदनी रात  चांदनी  रात है हाय क्या बात है
  • बरसात (गाना : पतली कमर है, तिरछी नज़र है ) , 
  • 1950 परदेस (गाना : मेरे  घूंघर  वाले  बाल औ  राजा )
  •  1951 आवारा (गीत : एक दो तीन अजा मौसम है रंगीन ) सगाई, अफसाना,
  •  1952 अम्बर, आन, 
  • 1953 शहनशाह, 
  • 1954 चोर बाजार, 
  • 1955 मि० मिसेज 55, बारादरी, 
  • 1956 सिपहसालार, 
  • 1957 उस्ताद,
  •  1958 यहूदी, चलती का नाम गाड़ी ( हेलेन जी के   साथ ), 1958   फागुन  (गाना शोख  शोख आंखे ) 
  • 1959  गेस्ट हाउस,
  • 1960 बसंत  
  • 1962 बेज़ुबान  
  • 1963 मुझे  जीने  दो 
  • 1964 शबनम ।


कक्कू मोरे अपनी  एक डांस के लिए रु 6000/- लेती थी जो उस समय के लिए काफी जयादा था. उन्हे रबर गर्ल भी कह जाता था। उनके पास बंगला गाड़ी सभी थे कुत्तो को घूमने के लिए अलग गाड़ी भी, पर जब 1983 में उन्होंने कैंसर से  बिना लडे़ ही जंग हार गई तो उनके  पास खाने को भी पैसे न थे ।

हेलेन जी को फिल्मो में कक्कू ही ले कर आयी और हेलेन ने  कैबरे को फिल्मो में एक अलग ही  स्थान दिलाया १९३८ में   एंग्लो इंडियन  पिता  और बर्मी  माता  के परिवार में जन्मी हेलेन जी ने अपने पिता को द्वितीय विश्व युद्ध में  खो दिया . तब वह माँ के साथ मुंबई आ गई . कक्कु ने उन्हें कोरस डांसर का काम १९५१ में दिलवाया फिल्म थी शबिस्तां और आवारा.



 सुन्दरता और मादकता की  पर्याय थी 'हेलन जी'। उनकी खूबसूरती और नृत्य का खुमार सिनेप्रेमियों के जेहन में आज भी कायम है।  'अलिफ लैला' (1953) में वह पहली बार बतौर सोलो डांसर नजर आईं। इसके बाद  'हूर-ए-अरब' (1955), 'नीलोफर' (1957), 'खजांची' (1958), 'सिंदबाद', 'अलीबाबा', 'अलादीन' (1965) जैसी फिल्मों में वह नजर आईं। 1958 में आई फिल्म 'हावड़ा ब्रिज' के गाने 'मेरा नाम चिन चिन चू' से हेलेन का जादू चलने लगा।  
  • 'ये रात फिर न आएंगी '  "हुज़ूरेवाला गर हो इजाजत"
  • 'गुमनाम'  'इस दूनिया में जीना है तो'
  •  'तीसरी मंजिल' का 'ओ हसीना जुल्फों वाली',
  •  'कारवां' का 'पिया तू अब तो आजा', 
  • 'जीवन साथी' का 'आओ ना गले लगा लो ना'  
  • 'डॉन' का 'ये मेरा दिल प्यार का दीवाना' 
  •  'इंतकाम' का 'आ जाने जां
  • और 'शोले' का 'महबूबा ओ महबूबा'
  • आया तूफान ( गाना : हम प्यार किये जायेंगे )
  • फिल्म जंगली का सुक्कु सुक्कु 
  • ईनकार फिल्म में मुंगडा मै गुड़ की डली 


कितना गिनाऊ अनगिनत गानों पर उनके पॉपुलर डांस है।

हेलेन के ज्यादातर गाने गीता दत्त और आशा भोंसले ने गाए है । उन्हें दो फ़िल्म फेयर पुरस्कार मिल चुका है। गुमनाम के लिए बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस के लिए नामित भी की गयी। २००९ में पद्म श्री से सम्मानित हेलेन जी  ७०० से ज़्यादा  फ़िल्में कर चुकीं है    

बिन्दू जी ने भी कई फिल्मों कैबरे नृत्य किया है। उनके द्वारा किया यादगार कैबरे है :
  • अनहोनी का "तो हगंमा हो गया"
  • कटी पतगं का "मेरा नाम है शबनम,  तुम्हरा नाम क्या है"
  • प्रीत  फिल्म की डोरी रूप है रंग है

उन्होंने करीब १६० फिल्मों में काम किया और ७ फिल्म फेयेर अवार्ड भी जीते. 


अरूणा इरानी  की  फिल्म  कारवां  के  लिए  
  • दिलवर  दिल  से  प्यारे और  चढ़ती  जवानी  उनके सबसे  लोकप्रिय  नृत्यों  में  से है. 
  • बॉबी में किया नृत्य ऐ  फंसा  भी  हिट  गाना    था   
उन्होंने करीब ५०० हिंदी, मराठी, कन्नड़ और गुजरती फिल्मों में काम किया और २ फिल्म फेयेर अवार्ड भी जीते 


फरयाल   जी भी कैबर के लिए जानी जाती है ।  फरयाल ने कई  फिल्मों में मुख्य किरदार किया पर ज्वेल थीफ में फरयाल का कैबरे "बैठे है उसके पास"  आने के बाद वह टाइप कास्ट हो गयीं और कैबरे के ही रोल मिलने लगे जैसे दो  ठग में  "ये  दुनिया  तो  है बस  पैसे  की", नफरत में "लो  मेरा  प्यार  ले लो"   



आशा पारीख जी ने भी कई आकर्षक नृत्य किए है जैसे कांटा लग (समाधि), सायोनारा (लव इन टोकियो) जो कैबरे स्टाइल में फिल्माए गए है।
मुमताज़ का फिल्म अपना देश के लिए किए 'दुनियाँ में लोंगों को' एक बेहतरीन कैबरे है। उनके और लोकप्रिय डांस है ब्रह्मचारी का आज कल तेरे मेरे प्यार के चर्चे या फिर हमजोली का टिकटिक टिक मेरा दिल डोले।



परवीन बॉबी जी का नमक हलाल का कैबरे जवानी ज़ानेमन तो सब को याद होगा ही।



जीनत आमान जी पर फिल्माया हरे रामा हरे कृष्णा (फिल्म हरे रामा हरे कृष्णा)  काफी पॉपुलर कैबरे था कुर्बानी फिल्म में लैला ओ लैला और आप जैसा कोई जिसे भी जीनत पर फिल्माया गया काफी लोकप्रिय हुआ था लैला ओ लैला का रीटेक वर्सन फिल्म रईस  में  सनी लियोनी पर फिल्माया गया।

उषा उत्थुप का फिल्म अरमान का गाना 'रम्भा हो' पर तो कई अभिनेत्रियां प्रेमा नारायण, कल्पना अय्यर कैबरे करती नज़र आई। हरि ओम हरि (फिल्म प्यारा दुश्मन,  कल्पना अय्यर) पर किए नृत्य भी पॉपुलर कैबरे है।



कैटरीना कैफ जी की तो कई बहुत ही पॉपुलर नृत्य है जैसे 
फिल्म तीस मार खां में शीला की जवानी
मेरे ब्रदर की दुल्हन में धुनकी धुनकी
रेस में जरा जरा टच मी टच मी और ख्वाब देखे झुठे मुठे
अग्नीपथ में चिकनी चमेली




मलाईका अरोड़ा भी ईस नृत्य  शैली  में निपुण है। दिल से में ट्रेन की छत पर किया नृत्य और  दबगं सिरीज में किए उनके दो नृत्य इसकी गवाही देती है।



हाल में कई फिल्मों में फिल्म की हिरोईन कैबरे करती दिखी है जैसे तलाश में करीना कपुर, हैप्पी न्यू यिअर में दीपीका पादुकोण, प्रियंका चोपड़ा का फिल्म गुण्डे में किया नृत्य अस्सलामे ईस्कुम
कई कई नृत्यंगनाओ पर फिल्माया कैबरे अभी भी ज़ेहन में आ रहा है और ऐसा लगता है की ये विषय अनन्त है। अत: मै यही खत्म करता हूँ। अगली बार हिन्दी फिल्मों के  क्लासिकल नृत्य के बारे में लिखूगा।

तब तक के लिए सायोनारा।




बाल गीत-३


अमिताभ सिन्हा रचित बालगीत


ककहरा पर  आधारित स्वरचित  बालगीत प्रस्तुत है। शायद आपको और बच्चों को भी पसंद आये ।


बाल गीत की सूची
बाल गीत-२
बाल गीत-३
बाल गीत-४
बाल गीत-५
बाल गीत-६
बालगीत-७
बालगीत८

६)क
कबूतर जब घर में घुस आया।
तन्नु को चिल्लाना आया।
दांत निपोड़ हँस पड़ा कबूतर।
भैया दौड़ा लेकर हंटर।
हटंर को फिर यूं लहराया।
डरा कबूतर मार भगाया।

HTML5 Icon
HTML5 Icon

७)ख
खरबुजा ले भागा बन्दर।
खाने बैठा छत के उपर ।
खरबूजे में मिर्च डली थी।
खाते ही रो पड़ा वो बन्दर।

८)ग
गोल मोल होती है रोटी
गोल मोल होती है दुनिया ।
रानी सेंके रोटी बढ़िया ।
राजा जी पानी भर लाये  ।
धो पोछ बरतन चमकाये ।
राजमहल में खुशी छा गयी।
प्रिन्सेज जब स्कूल से आए।
उसके नखरे उसकी बाते ।
पूरे दिन फिर चलती जाए।

HTML5 Icon
HTML5 Icon

९)घ
घड़ी टंगी दिवाल पर
करती टिक टिक टिक ।
देर हो रही स्कूल को
मुन्नी कहती रूक ।
मुन्नी कहती रूक पर
समय नहीं युँ रुकता।
समय बड़ा अनमोल है
नहीं दुकानों में बिकता।

Friday, May 15, 2020

बाल गीत - २

अमिताभ सिन्हा रचित बालगीत
पिछले बार मैंने अपनी स्मृति से कुछ बाल गीत प्रस्तुत किये थे । फिर मैंने सोचा  क्यों न खुद भी बालगीत लिखने का प्रयत्न किया जाय । मेरे नाती, पोते और पोती  के साथ ने काफी प्रेरित किया अतः स्वरचित बालगीत प्रस्तुत है। शायद आपको और बच्चों को भी पसंद आये ।




१) 
दादी की है सखी सहेली।
पापा की हैं आधी अम्माँ।।
रोज़ बुझाती हमें पहेली।
मेरी तो है नानी अम्माँ ।।
प्यारी लोरी गानेवाली।
कहे कहानी मेरी अम्माँ।।

२)
है मेरी गुड़िया की शादी ।
हलवा पूरी बरफी खाओ।।
नहीं किसी बुढ़िया की शादी ।
नाचो गाओ और नचाओ।।


३)
रसगुल्ला तो सबको भाता।
दादी खाती है नमकीन ।।
गुलाब जाम पर लट्टू भैया ।
मै तो कुल्फी का शौकीन ।।
४)
जलेबी गोल गोल।
मुंह में देती मिस्री घोल।।
बर्फी बनती है चौकोर ।
मुन्ना खाता इसको तोड़।।
रस में डूबा है रसगुल्ला।
सब खाते बिन हल्लागुल्ला ।।
५)
गेहूं पिसे चना पिसे और पिसे मक्की।
आंटा बने बेसन बने थक जाती है चक्की।।
बेसन से बने पकौड़े आंटे से बने रोटी।
ठेकुआ, हलुआ खाकर मुन्नी होगी मोटी।।


Tuesday, May 12, 2020

Europe Tour 2013 Part-4 #यात्रा

 The last blog on our Europe tour Part-3 journey up to Salzburg was covered. This blog part-4 covers journey between Munich-Zurich- Lucerne -Mt Titlis-Zurich-Delhi. .The complete itinerary looked like :






Blog Part-1 : Day 1: Delhi-Moscow-Munich (by air), Day 2 Munich-Nuremberg-Prague, Day Prague day 2 to 4.
Blog Part-2 Day-4 Prague to Vienna Day 5 Vienna to Budapest Day 5 to 7 
Blog Part-3 Day 7  Budapest -Melk- Salzburg Day 8 Salzburg- Munich  
Blog Part-4 Day 9 Munich to-Zurich (By Train) Day 10 Zurich -Lucerne-Mt Titlis-Zurich. Day 10 & 11 Return to Delhi via Moscow

See this part of journey on you tube 1.  Europe trip part-4 Munich-Zurich-Lucerne
2.  Lucerne-Engelburg-Mt Titlis-Zurich

Hotels where we stayed:
Night-1 :NH Munich airport
Nights 2&3 : Hotel Barcelo Prague
Nights 4 : Hotel Kavalier Vienna
Nights 5&6 : Hotel Mercure Budapest (Buda)
Night 7 : Hotel Ramda, Salzburg
Night 8 : Hotel Ibis Parkstad Munich
Night 9 : Hotel Walhalla Zurich

DAY-8 Munich to Zurich 


The Cosmos tour no 6050 for covering Hungary, Czechia, Austria and Germany was over on Day 8 and we had celebrated the same with a fare well dinner in a Munich restaurant. We still had another 2 days to cover a slice of Switzerland and then back to Delhi via Moscow. On day 9 in the morning we took our break fast early in the morning in Hotel Ibis, Munich and then called for a Taxi to go to Munich haupt bahnhof (Main Railway Station). Yes you heard it right we had planned to take a Swiss train passing through snow covered Alps.
The Hotel lobby was slippery due to continuous snowing for the whole night. It was raining even in the morning.   We were surprised when the taxi driver replied to me in Hindi. I asked him how he knows Hindi ? Is he an Indian or Pakistani? He said he is from Afghanistan and he has learnt Hindi from viewing Shahrukh Khan's  movies. So my daughter was right we were going to Yash Chopra's land i.e. Switzerland. We tried to capture last minute views of Munich from Taxi. 
HTML5 IconHTML5 Icon
Ibis Hotel-MunichIn Euro-rail Munich to Zurich

We boarded Euro cities train  no 196 and was excited for what we were about to see passing through the Alpine region while it was snowing.   

HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
In Euro-rail to ZurichIn Euro-rail to ZurichIn Euro-rail to Zurich
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
In Euro-rail to ZurichIn Euro-rail to Zurich In Euro-rail to Zurich
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
In Euro-rail to ZurichReached ZurichReached Zurich

When we reached Zurich we were in for an unexpected problem. I had seen in google map that Hotel I had booked was just 100 m from Zurich railway station. How ever I had no internet connectivity in Europe except WiFi available in all the Hotels we had stayed. We started walking with our trolley bags  in a direction I remembered. However instead of next left turn from the railway station, we took left turn the moment we came out of the station. In was raining and we took out umbrellas adding to our difficulties of walking. Soon we knew that we are lost. There was no one in the street for asking the way and we stopped at an road junction. Soon we saw a postman delivering mails. He was very helpful and we were happy to know that we were still near the Hotel. We soon walked to the hotel and checked in. 
Zurich is the financial capital of Switzerland and the largest and the busiest city. As per wikipedia it is "Permanently settled for over 2,000 years, Zürich was founded by the Romans, who, in 15 BC, called it Turicum. However, early settlements have been found dating back more than 6,400 years (although this only indicates human presence in the area and not the presence of a town that early)"
In the room I used the universal pin converters to charge our mobiles and tab from a Swiss power outlet. However I forgot to disconnect the tab which stopped working in the morning due to some fault may be over charging. Now we were dependent only on space left in the memory cards in our mobiles, camera and the flip video recorder. I called the travel agents to know about next day's program and was pleasantly surprised that our bus for sight seeing to Lausanne and Mt Titlis will start from the bus park just opposite our hotel.
I had earlier visited  Swiss towns of Geneva and Lagenthal but they were official visits & this was my first visit to Switzerland as tourists.

DAY-9  Zurich to Mt Titlis
 As we were likely to be late and since we had to catch our 10 PM flight to Moscow, we needed to check out and keep our luggage in Hotel's left luggage room after enjoying nice buffet break fast of the hotel. We asked the hotel reception to book for us train ticket for Zurich Airport for evening train. In the morning we had reached the bus park in front of the hotel. While waiting for the Titils bus we met Mr & Mrs Prasad from Vizag India, who were also going to Titlis by the same bus. We boarded the bus and started enjoying the views on way to Lucerne.  
HTML5 IconHTML5 Icon
Walhalla HotelView of tram from Hotel
HTML5 IconHTML5 Icon
With Prasads @ Bus parkZurich HB Station
We were looking to  both sides of bus for photographic views and both our cameras and video recorder was busy as we did not want to miss anything.
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
On way to LucerneOn way to LucerneOn way to Lucerne
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
On way to LucerneOn way to LucerneOn way to Lucerne
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
On way to LucerneOn way to LucerneHofkirche Leodegar Chrch 

LUCERNE 
On reaching Lucerne we had a walking tour of Chapel Bridge, Monument of Dying Lion and other attractions. 


Jesuit Church, Lucerne 
Chapel Bridge, Lucerne 


By the side of Lake 


Monument of Dying Lion


Mt  Pilatus Mountain Railway 

Scenes beyond Lucerne on way to Mt Titlis was breath taking. We came across rope ways routinely used for transportation by village residents of higher altitudes. We were to use cable cars and rotating Gondola to reach to the top of 10000 ft Mt Titlis.
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
Lucerne EngelbergLucerne to EngelbergLucerne to Engelberg
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
Lucerne to EngelbergLucerne to EngelbergLucerne to Engelberg
HTML5 IconHTML5 IconHTML5 Icon
Lucerne to EngelbergLucerne to EngelbergLucerne Engelberg

ENGELBERG AND MT TITLIS 

We reached Engelberg cable car station within 1 hour and went ahead to buy the cable car ticket up to Mt Titlis. We two and Prasad family occupied same closed cable car meant for 6 people. We were immediately transported to  fantasia land. Each of us were frantically using camera and video recorder and we did not speak for first 5 minutes. We needed to change cable car to "Rotair Gondola at a particular place. In between the car stopped probably for skiers. There it was written in Hindi "  टिटिलिस पहाड़ की चोटी पर  कृपया बैठे  रहे " at the next change for Rotair also contained following written in Hindi "विश्व के प्रथम घूमने वाले गोंडोला में आपका स्वागत हैं " Seems may Indian visit this place, we saw many Nepalese too. Mt Titlis has MSL of 10620 ft. 
HTML5 IconHTML5 Icon
Mt Titlis Cable CarMt Titlis Cable Car
HTML5 IconHTML5 Icon
Mt Titlis Cable CarMt Titlis Cable Car
HTML5 IconHTML5 Icon
Mt Titlis Cable CarAt Mt Titlis 
HTML5 IconHTML5 Icon
Mt Titlis Cable CarAt Mt Titlis
HTML5 IconHTML5 Icon
At Mt Titlis- Ice flierAt Mt Titlis
HTML5 IconHTML5 Icon
At Mt Titlis-Cliff  WalkSkier cable car Stop
HTML5 IconHTML5 Icon
At Mt Titlis -Ice FlyerAt Mt Titlis

By the time we returned it was little late for our train to Zurich Airport - Particularity as we were to collect our luggage and train ticket from Hotel reception. We rushed to railway station, and it took some more time to locate platform for the train going to airport. Any way just as we reached the train was about to move. My thanks to the train conductor who allowed us to enter the higher class compartment which was nearest to us. Anyway when we reached there was no hurry since check in was still to start. We were sweating due to layer of warm clothes due to heating in the airport and had to locate wash room quickly for changing our clothes. We had to spend   one night at Moscow airport for  our flight. We went clicking.      
HTML5 IconHTML5 Icon
Moscow SVO AirportMoscow SVO Airport
HTML5 IconHTML5 Icon
Moscow SVO airportMoscow SVO airport
We had an interesting incident in Aeroflot flight between Moscow and Delhi. We were not able to mention food choice during booking and usual anwers to it during check in was "we will serve you Indian Veg meals, if available". We managed. However we were sure our choice - Indian Veg meals. will be available in Delhi flight at least. It was Thursday and both of us needed only veg meals. To our dismay the air hostess had only chicken rice as Indian meals. When we refused and told her we won't have anything, She was at pains to see that we donot go hungry. She offered to serve chicken rice after removing chicken.. We smiled at her. She had her own doubt whether a vegetarian will eat chicken rice with chicken removed. She was how ever at pains to make us eat something. We were famished too having spent 16 uncomfortable hours without proper food, since hardly any vegetarian food was available at the airport. She however brought some bread, butter, fruit etc which was ok with us. So wait for my next travelogue.. neigh traveblog. Some videos are enclosed.

Monument of Dying Lion Lucerne



Cable Car to Mt Titlis 



On Titlis Top (Peak)