मैं कुसुमलता अपने छोटे भाई अमिताभ के माध्यम से आपको लिए चलती हूं अपने बचपन में।
आज के ब्लॉग का पात्र चाय का मध्यम आकार का ग्लास है।आप सभी ने चाय के टपरियों पर इस ग्लास को देखा होगा। जब गैस की सुविधा नहीं थी तब चाय दुकानों में एक बड़े टोपिए में कोयले के मंद जलते चूल्हे पर दूध धीमे धीमें उबलता रहता और एक मध्यम आकार के केतली में चाय । सामने एक ट्रे में करीने से आठ दस छोटे चाय के ग्लास सजे रहते। और ग्राहको को तुरंत जितने कप चाहिए उतने ग्लासों में चाय छान दी जाती। जिन्हें स्पैशल चाय चाहिए होता उनकी ग्लासों में टोपिए से सौंधा दूध डाला जाता।
इस ग्लास से मेरा परिचय तब हो गया जब मैं आठ साल की बच्ची ही थी यानि 1954 के आसपास। आज इसी ग्लास में चाय पी कर कई यादें ताजा हो गई और मै अपने बचपन में विचरण करने लगी।उस समय घर के भंसा याने रसोई में चाय सिर्फ दो बार बनती थी।बाकी समय चाय , सड़क चौराहा फुटपाथ स्थित चाय दुकान से चाय आती थी । मुंगेर में हमारा घर लल्लू पोखर के एक तिराहे पर था। बताती चलू कि हमारे पिता स्व उमेश चन्द्र प्रसाद एक व्यस्त एडवोकेट थे।
हमारे घर के नजदीक 3 दुकानें हुआ करती थी एक राधे चाय पान की दुकान दूसरी कमलेशरी पान बीड़ी सिगरेट की दुकान तीसरी गर्भे देवी की मिठाई दुकान। तीनों दुकानें मुहल्ले भर में प्रसिद्ध थी। हम लोग मिठाई के दुकान से जलेबी कचोरी बुंदिया हमेशा एक दो दिन में जरूर खाते थे। बचपन के दिन भी क्या दिन थे। तब बच्चे चाय नहीं पीते थे। तीनों दुकान मोहल्ले में बहुत लोकप्रिय थी और हमेशा भीड़ लगा ही रहता था।
जैसा उपर लिखे हैं घर में भोर ओर सांझ सिर्फ दो बार ही चाय बनती थी।बाद बाकी चाय राधा टी स्टॉल से आती थी। कोर्ट जाने से पहले बाबुजी 10 बजे तक घर के ऑफिस में ही काम करते थे।उस समय कई मुवक्किल घर में होते थे जिनका काम बाबूजी कर रहे होते थे । मुवक्किलों को राधे के दुकान से मंगाया चाय बिस्कुट सर्व होता था।ओर इसी तरह के शीशे के माध्यम आकर शीशे के ग्लास में चाय आती थी । घर में उपयोग के लिए कप प्लेट होते थे।
अब तक यह ग्लास मेरे बचपन का साथी है।और मुझे अभी भी बहुत पसंद है। पर इस तरह का चाय ग्लास फूट पथ चौराहा सड़क किनारे के दुकान में ही होते थे।अच्छे दुकान होटल में सुंदर कप प्लेट हुआ करते थे।रांची अपनी बिटिया रुमा के यहां ऐसे नए ग्लास ले आई हूं ।अभी शाम के 5 बजे है मै चली चाय पीने अपने नए बचपन के साथी ग्लास में आगे की बात अगले ब्लॉग में
