तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
कोई अनजाना सवाल है बता भी दो
गर फूलों का खयाल है बता भी दो
या बादलों को चुरा लाऊँ बता भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
चाँद तारे भी तोड़ लाऊँ बता भी दो
जान जाती है जाँ बस यूँ चुप न रहो
कहो तो दूर चला जाऊँ बता भी दो
जो भी कहना है खुलके सुना भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
तो आज सब्ज़ी क्या बनाऊँ बता भी दो
कभी मुस्कान में राज़ छुपा लेते हो तुम
कभी नज़रों से दिल को सजा देते हो तुम
अपनी दिल की बातें कभी सुना भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
कभी बारिश में चाय का इरादा होगा
कभी पकौड़ों का भी तो वादा होगा
दिल की फरमाइश जरा जता भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
कभी रूठी हो तो मैं मना लूँ हँस के
कभी थकी हो तो पास बिठा लूँ हँस के
अपनी चाहत का रस्ता दिखा भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
ना हीरे ना मोती ना दौलत चाहिए
बस तेरी हँसी की इजाज़त चाहिए
अपने होंठों से ये बात कह भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
तो सुनो आज आलू या भिंडी बनाओ
या अपनी पसंद की दाल चढ़ाओं
रोज़-रोज़ यूँ मुझको सता भी दो
तेरे दिल में आज क्या है बता भी दो
अमिताभ सिन्हा, प्रगति इंक्लेव, रांची
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