Monday, August 21, 2023

चंडीगढ़ , शिमला, कुफरी #यात्रा २०१४

शिमला : हिल स्टेशन कहते ही जो पहला नाम ज़ेहन में अता है वो है शिमला। हिमांचल प्रदेश की राजधानी। दिल्ली के बाहार अकेली जगह जहां राष्ट्रपति भवन है। पहली बार मैं १९६८ में गया था कॉलेज ट्रिप में । रिटायर होने के पहले चंडीगढ़ जाने का मौका ऑफिस के काम से मिल जाता था पर इतना टाइम नहीं होता था की शिमला जा सके। २०१४ में चंडीगढ़ में मेरी छोटी बहन संगीता का गृहप्रवेश था तो हम दोनों अपने ६ साल के पोते सिद्धांत या सिड के साथ चल पड़े। पोते को बर्फबारी देखनी थी इसलिए शिमला और कुफरी भी चला गया। सबसे पहले 1968 में चडीगढ़ - शिमला आया था कॉलेज ट्रिप में। हमारे सिविल इंजीनियर मित्र कश्मीर भी गए थे, तब नहीं गए तो अब तक कश्मीर नहीं जा पाए है । तब (१९६८) के चंडीगढ़ के बारे में मैंने एक ब्लॉग में लिखा था "हमारा अगला स्टॉप था चंडीगढ़ । पंजाब में जब एक जगह ट्रेन रुकी तो हम लस्सी पीने से अपने तो नहीं रोक पाए। हाथ भर लम्बे गिलास को तो हम देखते रह गए । चडीगढ़ के बारे में पढ़ रखा था । यह भारत के पहला पूरी तरह प्लान्ड शहर था । इसके आर्किटेक्ट थे Le Carbusier । चंडीगढ़ भारत का एक अद्भुत शहर है। यह शहर किसी भी राज्य का हिस्सा नहीं माना जाता। यह शहर भारत का केंद्र शासित प्रदेश है। इस शहर का नियंत्रण भारत सरकार के हाथों में है। इस शहर पर किसी भी राज्य का अधिकार नहीं। इस शहर की खास बात यह है की यह शहर पंजाब और हरियाणा दोनों राज्य की राजधानी है पर किसी भी राज्य का हिस्सा नहीं है । हम सुखना लेक रॉक गार्डन और रोज गार्डन देखने गाये । विधान सभा भवन देखा और एक फिल्म भी देखी ।"
पिछली बार चंडीगढ़ २००९ में आया था। दिल्ली से शताब्दी एक्सप्रेस से । एक छोटी लड़की शायद दो साल की होगी को मुझमे अपने नाना जैसा क्या दिखा मुझे नाना कह कर बुलाने लगी ।

ट्रेन में मिली नातिन , हमारा पोता और सहयात्री सिद्धांत

तब भी चंडीगढ़ के प्रमुख दर्शनीय जगहे देख ली थ। एक होटल में रुके थे - किस सेक्टर में याद नहीं। मुझे मंडी गोविंदगढ़ जाना था एक पेपर प्रेजेंट करना थ। लौटने पर स्टेशन पर कबूतरों का कब्ज़ा देखा। रेलवे ने प्लेटफार्म के ऊपर नेट लगा रखा था वे रुकने वाले नहीं थे। कब आपके सर पर टपका दे -- सभी बचने के कोशिश में थे।
२०१४ में हम अपने ६ वर्षीया पोता के साथ चंडीगढ़ शिमला घूमने निकले थे। हमने पुरे दिन के लिए एक टैक्सी कर ली जिसने हमें करीब करीब सारी जगहे दिखा दी। रॉक गार्डन में सिद्धांत को बहुत मजा आया। सबसे कम मजा उसे रोज गार्डन में आया। यह गार्डन श्री श्री नेक चंद नेमी द्वारा बनवाया गया। छोटे स्तर पर बनाया गया यह गार्डन अब ४० एकड़ में फैला है। यह गार्डन कोई फूल पौधों का उद्यान नहीं है, यह "best from waste " के सिद्धांत पर बना उद्यान है। कूड़े कचरे जैसे बोतल , प्लास्टिक , टूटे फूटे बिडलिंग मटेरियल जैसे टूटे टाइल्स इत्यादि चीज़ो से बना है। मुर्तिया झरने और बहुत कुछ। अविस्मरणीय जगह थी।

रॉक गार्डन , चंडीगढ़,सुखना लेक

हम सुखना लेक , म्यूजियम और रोज गार्डन भी गए।



UNESCO सिवालिक एक्सप्रेस - कालका शिमला हिल रेलवे, शिमला प्रसिद्द चर्च

दो दिन चंडीगढ़ घूमने के बाद हमलोग कालका शिमला हेरिटेज रेलवे से शिमला के लिए रवाना हो गए। चेयर कार से । कुर्सी अलग अलग घुमने वाली थी। आप ट्रेन के डायरेक्शन या उसके विपरीत कुर्सी कर सकते थे। ट्रेन लगभग खाली थी। हम एक एक विन्डो सीट ले कर चल पड़े। दोनों तरफ पहाड़ की खूबसूरती देखते देखते सफर करने लगे। फोटो भी खींचे। एक स्टेशन आया बरोग। पता चला स्टेशन के बाद आने वाला टनेल न० ३३ को बनाने के लिए खुदाई दोनों तरफ से की गई पर टनेल मैच नहीं हुई। टनेल बनाने वाले अंग्रेज इंजीनियर बरोग ने शर्मिंदगी में खुदकुशी कर ली पर अपना नाम इस स्टेशन और जगह को दे गये। यह इस मार्गका सबसे लंबा टनेल है १ की०मी० से भी ज्यादा।
शिमला पहुंच कर हम लक्करबाज़ार होते एक होटल पहुंच गए या टैक्सी वाले ने पंहुचा दिया। होटल पसंद आ गया इसलिए हम रुक गए। मार्च का महीना था पर ठंढ बहुत थी । बेड सर्कुलर था। हम मॉल रोड तक पहुंच गए कई सीढिया चढ़ कर और रोड पर चल कर। थक गए। किसी खाने की जगह खोजने लगे । ऐसी जगह जहां बैठा जा सके और खाना ज्यादा तीखा न हो। आखिर ऐसी जगह मिल गई। सभी के पसंद का खाना आर्डर किया। अगले दिन हम घूमने निकले कुफरी। सिद्धांत की बर्फ देखना था। पता चला बर्फ तो है , कुछ दिनों काफी पड़ी थी। हम चल पड़े। एक जगह बहुत अच्छा व्यू था कुछ देर रुक कर जब आगे बढ़े याक के साथ फोटो खींचाते लोग दिखे। सिद्धांत को एक पर बैठ कर फोटो खींचना चाह रहा था। उसे डर लग रहा था। उसको मना नहीं पाए तो एक के साथ उसका फोटो लिया बाद में इस पर हमने एक बाल गीत भी लिखा था ।



याक देखने पहुंचा कुफ्री सिद्धि दादा-दादी संग।
याक बड़ा था सजा धजा था, देख रह गया दंग।
मान नहीं सकता हूँ मैं कि यह है एक गाय।
इतने सारे बाल है इसके, काया भीमकाय।
दादू ने कहा दादी से, करके कुछ उपाय।
पीते है याक दूध की एक दो कप चाय।
रुकिए पहले ले ले फोटो सिद्धि को
याक के ऊपर देते है चढ़ाय ।
डरते क्यों हो यह हैं बस एक गाय।
कुछ न करेगा इसीको कहते चंवरी गाय ।
डर गया सिद्धि तब छोटा था।
फिर फोटो लिया यूँ ही खिचाय।


कुफरी में पिछली बार एक स्कीइंग क्लब तक गए थे। स्की ट्रैक पर फिसले थे । बर्फ कोट के में चले गए और जब क्लब में खाना लगे तब जेब से पानी टपकने लगा। इस बार घोड़े वालों ने घेर लिया। पता नहीं कहा ले कर जाते। बहुत मुश्किल से पीछा छुड़ाया क्योंकि सिड और उसकी दादी घोड़े पर बैठना नही चाहते थे।


शिमला होटल के पास कुली के साथ १९६८ , कुफ्री की वादियां १९६८ - BW photo coloured by me using special colour and brush

हम लोग स्नो पर चल कर एक ज़ू गया जहाँ कुछ हिमालयन जानवर रखे गए थे। बर्फ देखने का सिद्धांत का सपना पूरा हो गया। दादी पोता के बीच स्नो फेकने का गेम शुरू हो गया। हमारी टैक्सी ललित रेस्टोरेंट तक आई। हमने रेस्टोरेंट में कुछ स्नैक्स लिया और चाय भी पी । फिर हम लौट गए और जाखू गए।


कुफ्री - सिद्धांत दादी के साथ बर्फीले रास्ते पर , जाखू हनुमान मंदिर

एक लाठी किराये पर ले कर ऊपर मंदिर तक गए। बंदरो का बहुत हुजूम यहाँ हमेशा रहता है। हमारे सामने एक टूरिस्ट का मोबाइल ले कर एक बन्दर पेड़ पर चढ़ गया। मंदिर के पुरोहित के मदद से ही बन्दर मोबाइल लौटा गया।
हम जाखू के बाद शिमला स्टेशन गए और हेरिटेज ट्रैन से कालका लौट आये और एक दिन चंडीगढ़ में रुके। संगीता के छोटा डौगी इतना पोजेसिव था की सिद्धांत को उसके पास देख कर भोकने लगा । सिद्धांत एकदम डर गया और तुरंत चलने की ज़िद करने लगा। खैर डौगी को दरबे में बंद किया गया तब की वह सो पाया। अगले दिन हम ट्रेन से दिल्ली लौट आये।

आप स्वस्थ्य रहे , सानंद रहे और यात्रायें करते रहे। कुछ और यात्रायें अगले ब्लॉग में।

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