Thursday, April 30, 2020

बॉलीवुड में नृत्यों के प्रकार - आज का विषय -मुज़रा

मैं अपने ब्लोग्स के व्यूज की जाँच कर रहा था की कितने कितने वेयूज मिले तब पाया की सबसे ज्यादा  व्यूज  सिल्क स्मिता पर लिखे ब्लॉग को मिले हैं . दूसरे नंबर पर श्रीदेवी और फिल्मों पर लिखे  ब्लोग्स हैं. पाठको के रुझान के अनुसार मेरा यह ब्लाग भूतपुर्व फिल्मों में शामिल किए नृत्य के प्रकार पर आधारित है। भूतपुर्व इसलिए की आज जो फिल्में बन रही है उसमें सामिल नृत्य को एक नाम मिल चुका है और उसे सम्मिलित रूप में Bollywood dance कहा जाता है। ऐसे कैबरे जैसे ही डांस जिसे आइटम नंबर  कहते है भी आज कल के फिल्मों में होते है. पहले फिल्मों में नायिकाएं या तो नायक के साथ गाते और पेड़ के चक्कर लगाते वक्त नाचती थी या फिर कॉलेज function में स्टेज पर। बाकी नृत्य मुजरा और कैबरें के रूप में डाले जाते। ऐसे कई बार मुजरे वालियॉ ही नायिकाए होती थी। जैसे पाकीजा में स्व मीना कुमारी जी या उमरांव जान में रेखा जी। कई सुधी पाठकों के मन में और भी नृत्य प्रकार जैसे लोक नृत्य (आया सावन झूम के) या होली नृत्य (शोले, मदर इन्डिया),  जिसे नायिकाओ पर फिल्माया गया था भी आ रहा होगा उन्हें विश्वास दिलाता हूँ अगली बार पूरा research कर के ही आऊगा। इस ब्लाग को मैं उन सब लोकप्रिय मुज़रा नृत्य संगीत पर सीमित रखूंगा जिसे मैनै अभी तक देखें है। शाही दरबारो में रक्कासाओ (जैसे मुगले आज़म में मधुबाला जी का नृत्य) द्वारा किए जाने वाले नृत्य जिसे रक्स कहते थे भी एक प्रकार का मुजरा ही है ।
प्रायः मुजरा भी अक्सर कत्थक पर आधारित होता हैं। तवायफ का रोल जमींदारों नबाबों के काल की कहानियों में जरूर होते। 1970 में बानी खिलौना में एक तवायफ को  हीरो के बाप ने उसकी बीवी का नाटक करने के लिए राज़ी किया ताकि उसका पागल बेटा ठीक हो जाये खैर आगे बढ़ते है ।
 सबसे पहले मै शुरू करना चाहूंगा श्रीमती बैयजंतीमाला बाली जी से जिन्होंनें अपने नृत्य और अभिनय से कमसे कम दो पुश्तो को अपना कायल बना रक्खा था। 83 साल के उम्र में भी उन्होंने कमाल का performance दिया है जिसका vdo काफी Viral हुआ था। 1955 में बनी देवदास उनकी प्ररम्भिक फिल्मों में से थी । चन्द्रमुखी के किरदार को उन्होंनें इस खूबी से निभाया कि बाद में बने फिल्म में रणधीर कपूर के एक गाने के बोल ही थे "चन्द्रमुखी हो या पारो " इस फिल्म में "अब आगे तेरी मर्जी " गाने पर बहुत ही उम्दा नृत्य है। बिना किसी गाने या बोल पर किए उनके नृत्य लाजवाब है। अपने शुरूआती दौर में ही इस फिल्म के लिए बेस्ट सह नायिका  का फिल्म फेयर का पुरस्कार मिला ।


 उन्होंने इसे यह कह कर ठुकरा दिया की मेरा रोल नायिका का था न की सह नायिका का अवार्ड ठुकराने का यह पहला वाकया था   बी आर चोपड़ा की  फिल्म साधना  (१९५८) में "बैजंतीमाला फिर एक तवायफ के रोल में थीं "कहो जी तुम क्या क्या खरीदोगे " पर उनका डांस प्रशंसनीय है |


यो तो आम्रपाली में वैजन्तीमाला जी का किरदार तवायफ या बाई जी का नहीं था पर नगरवधू के रूप में उनके डांस लाजवाब थे | एक प्रतियोगता या "फेस ऑफ" में गजब का नृत्य है ।


मुजरा पर ब्लॉग लिखा जाये और स्व  मीना  कुमारी जी  अभिनीत 1972 की फिल्म पाकीजा का नाम न लिया जाय यह मुमकिन नहीं. पाकीजा में मीना  कुमारी जी  ने अविस्मर्णीय अभिनय और मुजरा किया है. चलते चलते गाना पर किया डांस कौन भूल सकता है ? फिल्म के अंतिम सीन  में किया मुजरा  "तीरे नज़र देखेंगे"  और ड्रामा भी कोई भूल नहीं सकता।


अब चलते है रेखा की तरफ।रेखा  जी ने उमरांव जान में  गजब का  अभिनय और  मुजरा किया है ।इस विषय पर बने फिल्मों में सबसे ऊपर के  नामों में इस फिल्म का नाम भी शामिल हो गया । "बस एक बार मेरा कहा मान लिखिए, और इन "आँखों की मस्ती के दीवाने हजारों है।" जैसे गाने अभी तक बहुत ही  लोकप्रिय हैं । 1970 में हेमा मालिनी जी की फिल्म आई थी " शराफत "। तवायफ  पर बनी फिल्म थी।  "शराफत छोड़ दी हमने" गाने पर मुज़रा तो ज़रूर फिल्माया गया होगा पर मैंने यह फिल्म नहीं देखी थी और इस के बारे में कुछ भी लिखना ठीक नहीं होगा। ऐसे हेमा जी के नृत्य के तो हम लोग दीवाने है ही। उसी तरह माधुरी दीक्षित, वरुण धवन और आलिया भट्ट ही हाल की फिल्म कलंक में माधुरी जी एक कोठा मालकिन हैं पर मेरी राय में इसका  नृत्य  " घर मोरे परदेशिया "  मुज़रा नहीं कहा जा सकता।



स्व मधुबाला जी अभिनीत "मुगले आज़म" एक कल्ट फिल्म थी और विशाल भव्य सेट इसका MSP हैं। मधुबाला जी ने अपने लघु जीवन काल में बौलीवुड में कई शानदार फिल्में की है। लेकिन मुग़ले आज़म में उनका किया कत्थक डांस देख कर अपने काम के लिए उनका समर्पण जाहिर हो जाता है। " प्यार किया तो डरना क्या " गाने पर उनके नृत्य को मैनें कई बार देखा था। सेट की भव्यता के कारण उनके नृत्य कहीं खो सा जाता है । हाल में ही टीवी पर सिर्फ उनके नृत्य पर ध्यान देने का निश्चय कर देखने पर मै दंग रह गया और मधुबाला जी के लिए मन में पल रहा आदर कई गुणा बढ़ गई। और कई अभिनेत्रियों ने तवॉयफ का रोल किया है और बेहतरीन मुज़रा भी । हेलन जी ने इस तरह के कई रोल किया था। विषय बहुत व्यापक है । मुझे इस चर्चे को यहीं बीच में छोड़ने के लिए मै क्षमा प्रार्थी हूँ ।
Trivia Pakeejah song
Inhi Logo ne was also part of 1941 film Himmat sung by Shamsad Begum.


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