
शांति दूत
परमाणु बम के तोपें के आगे
है आज सारा विश्व खड़ा
कोई तो अब भी आगे आए
कोई तो मध्य हो जाए खड़ा
कोई तो शांति की करे बात
कोई तो करे दिल अपना बड़ा
यह कैसी विडम्बना है भगवन
जब कोई छीनता भूमि गगन
जब त्राहि त्राहि है जग जीवन
क्यों आते नहीं कुछ करके जतन
पर कभी दूत बने थे तुम भी
रूकवा पाए महाभारत का रण?
कौन हूं मैं?
मै एक विशाल पेड़ हूं
मै छाया देता हूं
पर किसी को उगने नहीं देता
मैं सर्व शक्तिमान हूं
पर किसी को आगे बढ़ने नहीं देता
© अमिताभ सिन्हा, प्रगति इंक्लेव, रांची
❤️❤️
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