गीत नए गाते हैं
रीत कुछबनाते हैं,
सूरज के कई नए चक्कर
चलो फिर लगाते हैं
जन्मदिन मनाते है
केक नहीं लाएं तो
ओमबरती कहां जलाएंगे हम?
आप कहेंगी मत खाना
फिर भी खाएगे हम
गिफ्ट भी लाएंगे हम
दिल भी बहलाएंगे हम
पसंद न आया अगर
रसीद भी दिखलाएंगे हम
जन्मदिन की शुभकामना
स्वास्थ्य रहे मस्त रहे
आपका गुस्ताख़
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