कहीं बरसा रहे हो शोले, कहीं बर्फ के गोले
मैंने यहां जन्म लिया, इसमें मेरी क्या खता रे,
कभी धूप जला देती, कभी ठंड सता दे,
ऐ मालिक तू ही बता दे, किसीको क्या सज़ा दे।
किस्मत के इन पन्नों पर, किसने लिख दी कहानी,
किसी के हिस्से सावन, किसी के हिस्से वीरानी,
मैं तो बस राह का राही, ढूंढूं अपनी मंज़िल,
कभी मिलती है खुशियां, कभी आँखों में पानी
कहीं बरसा रहे हो शोले, कहीं बर्फ के गोले,
मैंने यहां जन्म लिया, इसमें मेरी क्या खता रे,
बरफ का ढेर लगा दे, भेज रहा हूं यहां का पता,
ठंडी सी एक राहत दे दे, मिट जाए ये व्यथा,
मेरे घर को भी स्विटजरलैंड न सही तो कश्मीर बना दे
थोड़ी सी ठंडी हवाएँ, थोड़ा सा बरफ गिरा दे
कहीं बरसा रहे हो शोले, कहीं बर्फ के गोले,
मैंने यहां जन्म लिया, इसमें मेरी क्या खता रे,
जलते हैं अरमान सारे, जैसे सूखी सी लकड़ी,
थोड़ी सी बारिश कर दे, खिल जाए फिर से धरती।
ना शिकवा है किसी से, ना कोई गिला है,
बस इतना सा अरमान, और थोड़ा सा सिला है
कहीं बरसा रहे हो शोले, कहीं बर्फ के गोले,
मैंने यहां जन्म लिया, इसमें मेरी क्या खता रे,
जहां भी भेजे किस्मत, हंस के जी लेंगे,
गर साथ तेरे रहमत का, एक भी कतरा मिला है।
कहीं बरसा रहे हो शोले, कहीं बर्फ के गोले,
मैंने यहां जन्म लिया, इसमें मेरी क्या खता रे
Amitabhsinha ; autobiography ; travelogue; events; history; film; Bollywood Hindi stories & Poetry; Amitabh's blog !
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